बीना Google Translator के Translate कैसे करें||Google में बीना लिखे कैसे Translate करें.

 बीना Google Translator के Translate कैसे करें||Google में बीना लिखे कैसे Translate करें.

इस बात को लेकर काफी लोग परेशान रहतरहते है कि आखिर उनको अंग्रेजी नहीं आती है या फिर हिन्दी नहीं आती है तो वो क्या करे!

कुछ लोगों को ये पता तो है कि हमें कोई दूसरा भाषा नहीं आती है तो हम उसे गुुगल में ट्रांसलेट कर के समझ लेंगे, लेकिन फिर उनको एक परेशानी आती है कि उनको हर बार जाकर गुगल में टाइप करना पड़ता है

तो दोस्तों अब आपको घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है अब गुगल ने ही खुद अपने फिचर में एक नया फिचर अपडेट किया है कि जो भी आपको भाषा नहीं आता है उसका बस फोटो स्कैन करो और आपका वो भाषा ट्रांसलेट हो जाएगा

अब आपको एक प्रश्न दिमाग में आ रहा होगा कि मेरा तो फोन में गुगल ने अपने फिचर में ऐसा कोई फिचर अपडेट नहीं किया है तो आपको अब मैं बताता हूँ कि वो फिचर आपको कैसे मिलेगा

तो दोस्तों यदि ऐसा हो रहा कि आपके फोन में गुगल ने ऐसा नहीं किया है तो आपको बस सिंपल सा एक चिज करना है अपने फोन में गुगल को एक बार अपडेट कर देना है

ट्रांसलेट करने का प्रोसेस क्या है

आपको अपने गुगल को अपडेट करने के बाद ओपन करना है उसके बाद आपको कुछ इस तरह का इंटरफेस दिखाई देगा👇

अब आपको यहाँ पर उपर एक राइट साइड में एक कैमरा का आइकाॅन दिखाई देगा सर्च बार के बगल में आपको जो कुछ भी ट्रांसलेट करने है उसका बस आपको फोटो स्कैन करना है वो आपका ट्रांसलेट हो जाएगा

क्या गुगल ट्रांसलेटर भरोसेमंद है? 

अगर एक शब्द में जवाब चाहिए तो नही,

अब आते है विस्तृत जानकारी के ओर – गूगल ट्रांसलेट में कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका सही सही मतलब नहीं मिलता है जैसे कि अगर हम मान लेते हैं कि अगर एक शब्द है प्लीज इसका एक अर्थ कृपया भी होता है और एक कर खुशी भी होता है तो अगर आप गूगल ट्रांसलेट पर यह सर्च करें कि प्लीज लीव मी अलोन या फिर आई एम प्लीज गूगल इन दोनों का एक ही मीनिंग बताता है।

हो सकता है कि गूगल के नए अपडेट में यह अब नहीं आ रहा हो ।

फिर से मैं दोहराना चाहूंगा – गूगल ट्रांसलेट को हम भरोसेमंद नहीं मान सकते हैं। इसमें बहुत सारे त्रुटियां है और इसमें अभी सुधार के बहुत संभावनाएं हैं।

क्या गुगल ट्रांसलेटर के पास हर एक शब्द का अंग्रेजी अर्थ सही होता है? 

तो दोस्तों यदि आप ये जानना चाहते हैं कि क्या गुगल ट्रांसलेटर में हम कुछ भी सर्च करें तो हमें उसका एक सही और रियल जानकारी मिल सकती है तो इसका उत्तर ये होगा कि नहीं, 

क्योंकि गुगल के पास भी हर एक चिज का एक सही और रियल इनफार्मेशन नहीं होता है

आपके इस डाउट को सही करने के लिए चलिए हम एक उदाहरण के द्वारा समझते हैं, जैसा कि हमलोग गुगल में आए और यहाँ पर हम सर्च किए -Warmer तो दोस्तों वैसे में गुगल के तरफ से भी वही चिज लिखा हुआ मिल जाएगा, तो इससे हम ये साफ साफ समझ सकते हैं कि गुगल के पास भी हर एक चिज का एक सही और रियल इनफार्मेशन नहीं होता है

गुगल आपके बारे में क्या क्या जानता है? 

*आपके बारे में सबकुछ जानता है Google!*

*ये भी जाने पढ़ाई से थोड़ा हटकर*

आप घर से ऑफिस के लिए निकले नहीं कि आपके मोबाइल पर मेसेज आ जाता है कि पहुंचने में इतने मिनट लगेंगे. साथ ही, आप जिन जगहों पर जाते हैं, उसकी लोकेशन के मेसेज भी आपके मोबाइल में आते रहते हैं. क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा कैसे होता है?

असल में यह सब Google का खेल है. गूगल हर जगह है. मैप्स से लेकर YouTube तक. गूगल के इस तरह फैले जाल का मतलब है कि भले ही आपको पसंद आए या नहीं, इसके पास आपका पर्सनल डेटा जुटाने के लिए पर्याप्त मौके होते हैं.

Google अपने कई प्रॉडक्ट्स के जरिए दो तरीकों से आपका डेटा कलेक्ट करता है –

▪ *ऐक्टिव कलेक्शन-*

जब कोई व्यक्ति गूगल के प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करता है और Gmail के लिए साइन अप करने या सर्च करने में अपनी पर्सनल जानकारियां उपलब्ध कराता है.

▪ *पैसिव कलेक्शन-*

इसमें कई बार यूजर की जानकारी के बिना उसका डेटा कलेक्ट किया जाता है. यह डेटा मोबाइल के बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स, गूगल के ऐडवर्टाइजिंग टूल्स और इसके ऑपरेटिंग सिस्टम Android के जरिए जुटाया जाता है.

‍♀ *क्या-क्या जानता है Google?*

*मेट्रो का रूट-* Google Maps आपकी लोकेशन को ट्रैक करता है. GPS आपके IP एड्रेस के साथ कोर्डिनेट करता है. यह आपको ट्रैक करने के लिए करीब के सेल टावर्स और Wi-Fi एक्सेस पॉइंट का भी इस्तेमाल कर सकता है.

*कैसी खबरें पढ़ते हैं आप-* गूगल आपकी सर्च हिस्ट्री को रिकॉर्ड करता है और आपकी दिलचस्पी का पता लगाता है और विज्ञापनों के साथ उसी हिसाब का कंटेंट (खबरें) आपको उपलब्ध कराता है.

*म्यूजिक ऐप जानते हैं आपकी पसंद-* गूगल सर्च की तरह म्यूजिक ऐप इस चीज को रिकॉर्ड करता है कि आप किस तरह का म्यूजिक सुनते हैं और उसी हिसाब से आपका प्रोफाइल बनाता है और आपको टारगेटेड ऐड भेजता है.

*लोकेशन का डेटा-* गूगल आपके बारे में इतना डेटा जुटा लेता है कि यह आपको बताता है कि आप वॉक कर रहे हैं, दौड़ रहे हैं या किसी गाड़ी में चल रहे हैं.

*क्रेडिट/डेबिट कार्ड के डीटेल्स-* Google Pay के पास न केवल आपके क्रेडिट और डेबिट कार्ड के डीटेल्स होते हैं, बल्कि आपने क्या प्रॉडक्ट खरीदा है इसका डेटा भी गूगल पे के पास रहता है। यह आपको इसी हिसाब से टारगेटेड ऐड भेजता है.

*Email को Scan करता है Google-* आपकी दिलचस्पी का पता लगाने के लिए गूगल आपके ई-मेल को स्कैन करता है. गूगल आपके Email के कंटेंट के आधार पर विज्ञापन कस्टमाइज करता है और आपको भेजता है.

*YouTube विडियो-* यह विडियो प्लेटफॉर्म इस बात को रिकॉर्ड करता है कि आप किस तरह के विडियो देखते हैं. साथ ही, आप विडियो कहां और कब देखते हैं. non-google operating system पर भी गूगल की पहुंच आपके डेटा तक रहती है.

♨ *थर्ड पार्टी ऐप्स की भी जानकारी-* ऐंड्रॉयड डिवाइस पर अगर आप थर्ड-पार्टी ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं तो भी गूगल के पास इसकी जानकारी होती है.


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